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5G वायरलेस मोबाइल फोन टेक्नोलॉजी की 5वी जनरेशन है या पांचवी पीढ़ी है इससे पहले आप 1G, 2G, 3G और4gको इस्तेमाल कर चुके हैं 5G की फुल फॉर्म है Fifth Generation Wireless और यह 4G के बाद एक बहुत बड़े वायरलेस नेटवर्क टेक्नोलॉजी (Wireless network technology) के रूप में सामने आने वाला है
आप में से बहुत सारे लोग होंगे जिन्होंने 1g नेटवर्क वाले फोन का भी इस्तेमाल किया होगा तभी से मोबाइल नेटवर्क में जबरदस्त क्रांति चल रही है पिछले एक दशक में यह तकनीक पूरी तरह से बदल चुकी है आज हर किसी के पास स्मार्टफोन है जिससे वह घर बैठे अपने ढेर सारे काम कर सकता है जहां एक ओर 1जी टेक्नोलॉजी से ही दुनिया का परिचय वायरलेस टेलीफोन से यानि मोबाइल से हुआ, जो बिना तार के कहीं भी आ जा सकता था। जो एनालॉग सिग्नल पर आधारित था.
1जी टेक्नोलॉजी एनालॉग सिग्नल पर आधारित थी जिसमें कुछ खामियॉ भी थीं जैसे- मोबाइल में खराब आवाज आना, मोबाइल हैण्डसेट का बडा आकार और वजन। साथ ही इसमें डेटा की रफ्तार बहुत कम थी केवल 2.4 kbps, यानि अगर एक 4-5MB का गाना डाउनलोड करना हो तो भी घण्टों लग जायें।
इन खामियों को दूर किया 2जी टेक्नोलॉजी ने यानि वायरलैस मोबाइल फोन की दूसरी जनरेशन ने। यह तकनीक डिजीटल सिग्नल पर आधारित थी, इससे आप फोनकॉल के साथ-साथ इंटरनेट का आनंद भी आराम से ले सकते थे लेकिन 2जी की डाटा ट्रांसफर स्पीड 236 kbps है, जिससे पिक्चर मैसेज, टेक्स मैसेज और मल्टीमीडिया मैसेज बडें आराम से भेजे जा सकते हैं। लेकिन वीडियो कॉल, वीडियो कांफ्रेसिंग और मोबाइल टेलीविजन के मामले में 2जी सफल नहीं है।
3जी की इसकी डाटा ट्रांसफर स्पीड 21 mbps थी, जो 2जी के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इसनें मोबाइल यूजर्स के लिये वीडियो कॉल, वीडियो कांफ्रेसिंग और मोबाइल टेलीविजन के रास्ते खोल दिये। विज्ञापनों में भी 3जी के इसी फीचर को दिखाया जाता था, 3जी के आने के बाद मोबाइल और लैपटॉप के लिये स्पेशल ऑनलाइन टीवी एप्लीकेशन आने लगीं, साथ ही साथ फोन में फ्रंट फेसिंग कैमरा भी आने लगा वीडियो कॉल करने के लिये। जिससे आजकल आप सेल्फ़ी (Selfie) लेते हो। लेकिन याद रहे कि ये सेल्फ़ी वाला कैमरा 3जी की देन है।
आपकाे जानकर आश्चर्य होगा कि 2015 में आने वाली इस 4 जी टेक्नोलॉजी की शुरूआती साल 2000 में ही हो गयी थी। वैसे यह तकनीक 3जी के मुकाबले लगभग 5-10 गुना तेज है यानि इसमें इंटरनेट की स्पीड 100 Mbps है । यानि स्मार्टफोन पर बिना बफरिंग के टीवी देखना, विडियो कॉल करना, मूवी, सॉफ्टवेयर, गेम्स डाउनलोड करना बहुत आसान हो गया है.
5G को समझने के लिए सबसे पहले में वायरलेस नेटवर्क को समझना होगा असल में अभी 4G यानि Fourth-generation (4G) Long-Term Evolution (LTE) wireless technology के भी सिग्नल हमारे पास आते हैं वह सभी Radio Waves के माध्यम से प्राप्त होते हैं इनको Transmit करने के लिए बड़े-बड़े Mobile Towers लगाए जाते हैं वहीं 5G Wireless Signals को Transmit करने के लिए बहुत सारे छोटे Small Cell Stations बनायेंं जायेगेंं
अब इसकी वजह आपको समझनी होगी कि 5G में आप हाई स्पीड से डाटा कैसे Transmit कर पाएंगे और यह multiple small wave antenna क्यों लगाए जाएंगे असल में 5G wireless broadband technology का spectrum 30 से 300 gigahertz (Ghz) के बीच होता है जिसे Millimeter wave या millimeter band कहा जाता है अब चूंकि Millimeter Wave Spectrum में band of spectrum हमेशा 30 GHz से 300 GHz के भीतर ही होती है Millimeter wave (MM Wave) केवल Short distances में Transmit हो सकती हैं .
तो इसके लिये हर जगह Millimeter Wave Antenna लगाने होगें, जिससे आपकी कोई डिवाइस इससे तुुरंत कनेक्ट हो जायेगी, इसके साथ एक परेशानी होगी जब आप तेजी से कहीं जा रहे होगें तब आपका फोन Millimeter Wave Antenna से के बाद तुरंत दूसरे Wave Antenna से कनेक्ट होगा
अब समय है मशीन लर्निंग का या अगर इसका एडवांस लेवल आप कहे तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विकसित हो रहा है जिस में इंटरनेट की बहुत बड़ी सहभागिता है जब आप इंटरनेट पर कोई भी डाटा अपलोड करते हो यानी इनपुट कराते हो
स्वचालित कारें भी एक दूसरे से बेहतर संवाद कर पाएंगी और यातायात और मैप्स से जुड़ा डेटा लाइव साझा कर पाएंगी
5G के दौरान बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी यानि मशीनें आपस में तेजी कनेक्ट करने लगेंगी अभी कहीं ज्यादा स्मार्ट हो जायेंगी
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